अरुणाचल प्रदेश भारत का इकलौता राज्य है जिसकी सीमा एक साथ तीन एशियाई देशों, चीन, भूटान और म्यांमार से जुड़ती है, साथ ही यह असम और नागालैंड से भी सटा हुआ है। यही कारण है कि इसे भारत का “पूर्वी प्रवेश द्वार” कहा जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने में अहम भूमिका निभाती है और कठिन पहाड़ी क्षेत्र के बावजूद यहां रणनीतिक सड़कों और सीमावर्ती संपर्कों का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
तीन देशों से जुड़ा भारत का अनोखा राज्य
भारत का इकलौता राज्य अरुणाचल प्रदेश है, जहां से पैदल या सड़क मार्ग से तीन देशों चीन, भूटान और म्यांमार और दो राज्यों असम और नागालैंड में जाया जा सकता है। इसकी रणनीतिक स्थिति इसे भारत का अहम सीमावर्ती प्रवेश द्वार बनाती है। हालांकि सिक्किम राज्य की सीमा भी तीन देशों से लगती है लेकिन यह केवल एक भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल से सीमा साझा करता है।
अंतरराष्ट्रीय सीमाएं और क्षेत्रफल
अरुणाचल प्रदेश का कुल क्षेत्रफल लगभग 83,743 वर्ग किलोमीटर है। इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा लंबाई करीब 1,680 किलोमीटर से ज्यादा है। पश्चिम में भूटान से लगभग 160 किमी, उत्तर व पूर्व में चीन से करीब 1,080 किमी और पूर्व में म्यांमार से लगभग 440-550 किमी सीमा लगती है। इसके अलावा राज्य की घरेलू सीमाएं असम और नागालैंड से भी सटी हैं।
पड़ोसी देशों से सड़क संपर्क
अरुणाचल से म्यांमार के लिए NH-153 (स्टिलवेल रोड) अहम रास्ता है, जो नामपोंग होते हुए पांगसू पास तक जाता है। भूटान के लिए तवांग-लुमला-ताशिगांग मार्ग प्रस्तावित है, जिससे पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। चीन सीमा पर बुमला पास, किबिथू जैसे स्थान हैं, जहां भविष्य में व्यापारिक संपर्क की संभावना रहती है, हालांकि सुरक्षा कारणों से फिलहाल प्रतिबंध हैं।
सीमावर्ती व्यापार केंद्र
भारत-म्यांमार सीमा पर नामपोंग लैंड कस्टम स्टेशन सक्रिय है, जहां पारंपरिक मेलों और सीमित व्यापार की सुविधा मिलती है। चीन सीमा पर बुमला, किबिथू और केंजामाने ऐतिहासिक व्यापार बिंदु रहे हैं, जिन्हें द्विपक्षीय सहमति से दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। भूटान के साथ संपर्क मुख्य रूप से तवांग क्षेत्र से प्रस्तावित है, जिससे सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे।
भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में खास रोल:
अरुणाचल प्रदेश भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का प्रमुख हिस्सा है। यहां से भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय हाईवे जैसी प्रोजेक्ट आगे बढ़ा रहा हैं। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा बनाए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर से सुरक्षा, व्यापार और पर्यटन तीनों को मजबूती मिलती है। ऐसे में अरुणाचल भारत के लिए एशिया से जुड़ने का रणनीतिक सेतु बनता जा रहा है।
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