भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु कौन-सा है, यहां जानें नाम

Jan 28, 2026, 13:17 IST

भारत के राष्ट्रीय पशु के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन राष्ट्रीय विरासत पशु के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है। इस लेख में हम राष्ट्रीय विरासत पशु और इससे संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे।

राष्ट्रीय विरासत पशु
राष्ट्रीय विरासत पशु

भारत में आपने अलग-अलग राष्ट्रीय चिह्नों और प्रतीकों के बारे में पढ़ा होगा। यदि आपसे पूछा जाए कि भारत का राष्ट्रीय पशु कौन-सा है, तो आप बाघ जवाब देंगे। लेकिन, यदि आपसे कोई पूछे कि भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु कौन-सा है, तो क्या आप इसका जवाब जानते हैं।

यदि हां, तो यह लेख आपकी राष्ट्रीय विरासत पशु के बारे में जानकारी को और बढ़ाने में मदद करेगा। वहीं, यदि आप इसका जवाब नहीं जानते हैं, तो यह लेख आपको इस संबंध में पूरी जानकारी देगा। तो, चलिए आइए, इस विषय को गहराई से समझते हैं। 

भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु कौन-सा है

सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु कौन-सा है। आपको बता दें कि भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु हाथी है।  

2010 में मिला आधिकारिक दर्जा

भारत सरकार की ओर से 22 अक्टूबर, 2010 को हाथी को भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु का दर्जा दिया गया था। इसके लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से गठित एलिफेंट टास्क फोर्स ने सिफारिश की थी। 

हाथी को ही क्यों चुना गया राष्ट्रीय विरासत पशु

अब सवाल है कि भारत में जब और भी पशु हैं, तो हाथी को ही राष्ट्रीय विरासत पशु को क्यों चुना गया। दरअसल, भारत का इतिहास उठाकर देखें, तो हाथी शुरू से ही हमारी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हिंदू धर्म में हाथियों का विशेष महत्त्व भी है। राजा-महाराजाओं के समय हाथियों को शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता था।

युद्ध के दौरान हाथी राजा-महाराजाओं की सेना में टैंक की तरह होते थे, जिन पर सवार होकर युद्ध लड़ा जाता था। वहीं, हाथी एक कीस्टोन प्रजाति भी है।

यह जंगलों में रास्ता बनाते हैं, जिनसे छोटे जानवरों को नया रास्ता मिलता है। वहीं, यह जंंगलों को संरक्षित करने में भी मदद करते हैं। दूसरी तरफ, भारत में हाथियों की संख्या और आवास में गिरावट दर्ज हो रही थी, जिससे इन्हें संरक्षण की आवश्यकता थी।

राष्ट्रीय विरासत का दर्जा मिलने बाद हाथियों के संरक्षण के प्रति सुरक्षा और जागरूकता को बढ़ाया गया।

हाथियों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदम

ऐसा नहीं है कि 2010 के बाद ही हाथियों के संरक्षण को लेकर काम किया गया है, बल्कि भारत में प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 में ही शुरू कर दिया गया था। यह हाथियों के गलियारे, आवास और उनकी सुरक्षा के लिए शुरू किया गया था।

हाथियों के गलियारे वे होते हैं, जो कि उनके दो प्राकृतिक आवासों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। भारत में ऐसे 100 से अधिक गलियारे चिह्नित किए गए हैं। वहीं, हाथियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ‘हाथी मेरे साथी अभियान’ भी चलाया गया है।

हर 5 साल में होती है हाथियों की गणना

भारत में हाथियों के संरक्षण के लिए हर 5 साल में हाथियों की गणना की जाती है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों में हाथियों की कुल गिनती और उनके आवास व गलियारों को गिना जाता है।

अक्टूबर 2025 में जारी 'Status of Elephants in India 2021-25' (SAIEE) की रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे देश में कर्नाटक में सबसे अधिक हाथी पाए जाते हैं। यहां कुल 6013 हाथी रिकॉर्ड किए गए हैं। इसके बाद असम दूसरे स्थान पर हैं, जहां 4159 हाथी और तमिलनाडू 3136 हाथियों के साथ तीसरे स्थान पर है। आपको बता दें कि हर साल 12 अगस्त को ‘विश्व हाथी दिवस’ भी मनाया जाता है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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