NSG और SPG में क्या है सबसे बड़ा फर्क? प्रधानमंत्री की सुरक्षा किसके जिम्मे? जानें पूरी डिटेल

Last Updated: Apr 22, 2026, 12:36 IST

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) में मुख्य अंतर उनके काम का है। NSG आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन संभालती है, जबकि प्रधानमंत्री की 24x7 सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह SPG के पास होती है। SPG सिर्फ PM की सुरक्षा पर केंद्रित एक विशेष बल है।

जब भी देश की सुरक्षा या किसी खास व्यक्ति की सुरक्षा की बात होती है, तो दो प्रमुख एजेंसियों का नाम सामने आता है, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG)। दोनों ही अपनी-अपनी भूमिका में बेहद अहम और शक्तिशाली हैं। 

NSG की स्थापना 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद की गई और इसे 1986 के अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता मिली। वहीं SPG का गठन 1985 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुआ, जिसे 1988 के SPG एक्ट के जरिए औपचारिक रूप दिया गया। 

क्या है जिम्मेदारियां

दोनों के काम में सबसे बड़ा फर्क है। SPG का मुख्य कार्य सिर्फ प्रधानमंत्री की नजदीकी सुरक्षा देना है, चाहे देश में हों या विदेश में। वहीं NSG का दायरा काफी व्यापक है, यह आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, बंधक मुक्ति, एंटी-हाइजैकिंग, बम निष्क्रिय करना और कई VIPs को Z+ सुरक्षा देना जैसे काम संभालती है।

SPG किसके अधीन करती है काम

SPG सीधे कैबिनेट सचिवालय के अधीन काम करती है और इसका नेतृत्व IPS अधिकारी करते हैं। इसमें ऑपरेशन, ट्रेनिंग और इंटेलिजेंस जैसे अलग-अलग विंग होते हैं। दूसरी तरफ NSG गृह मंत्रालय के अधीन आती है और इसमें सेना के कमांडो (SAG) और CAPFs के जवान (SRG) मिलकर काम करते हैं, जिससे यह एक संयुक्त बल बनती है। 

SPG और NSG के काम कैसे है अलग 

एसपीजी का काम केवल भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा करना है। साल 2019 में हुए संशोधन के बाद एसीपीजी का पूरा काम मौजूदा पीएम और उनके साथ रहने वाले परिवार की सुरक्षा करना होता है। जबकि आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, एंटी-हाइजैकिंग या किसी VIPs को Z+ सुरक्षा देना है। 

कैसे होती है भर्ती और ट्रेनिंग

SPG में भर्ती मुख्य रूप से CAPFs से प्रतिनियुक्ति के आधार पर होती है, जहां कमांडो को क्लोज प्रोटेक्शन और हाई-रिस्क सिक्योरिटी की ट्रेनिंग दी जाती है। वहीं NSG में सेना, नौसेना, वायुसेना और CAPFs से चयन होता है, जहां बेहद कठिन शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसे दुनिया के मुश्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में गिना जाता है।

कैसे निर्धारित होती है इनकी तैनाती

SPG की तैनाती स्थायी रूप से प्रधानमंत्री की सुरक्षा में होती है और यह किसी ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेती। इसके विपरीत NSG एक आपातकालीन फोर्स है, जो बड़े संकटों में सक्रिय भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए 2008 में मुंबई आतंकी हमले के दौरान NSG ने महत्वपूर्ण रोल निभाया था। वेतन और भत्तों में भी अंतर है, SPG में उच्च जोखिम भत्ते और सीमित अवधि की डिपुटेशन होती है, जबकि NSG में लंबी अवधि तक कठिन ऑपरेशनल ड्यूटी करनी पड़ती है।

आसान शब्दों में, NSG जहां देश की सुरक्षा के लिए आतंकवाद से सीधे लड़ती है, वहीं SPG का पूरा फोकस सिर्फ प्रधानमंत्री की अत्याधुनिक सुरक्षा पर होता है। दोनों मिलकर भारत की बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।

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Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

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First Published: Apr 22, 2026, 12:36 IST

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