टिकट महाराष्ट्र में, स्टेशन मास्टर गुजरात में! जानें कौन-सा है भारत का यह अनोखा रेलवे स्टेशन
भारत में एक ऐसा अनोखा रेलवे स्टेशन भी मौजूद है, जिसका टिकट महाराष्ट्र में खरीदा जाता है, तो स्टेशन मास्टर का कमरा गुजरात में है। इस लेख में हम इस रेलवे स्टेशन के बारे में विस्तार से जानेंगे।
भारत में आपने अलग-अलग रेलवे स्टेशनों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, हमारे देश में एक अनोखा रेलवे स्टेशन ऐसा भी है, जहां टिकट महाराष्ट्र में खरीदा जाता है, तो स्टेशन मास्टर का कमरा गुजरात में मौजूद है।
यहां एक मशहूर बेंच भी है, जिसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र में है, तो आधा हिस्सा गुजरात में है। ऐसे में यह अनोखा रेलवे स्टेशन बहुत ही प्रसिद्ध रेलवे स्टेशन है। कौन-सा है यह स्टेशन और कहां है स्थित, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
दो राज्यों में आता है रेलवे स्टेशन
महाराष्ट्र और गुजरात में आने वाला यह अनोखा नवापुर रेलवे स्टेशनहै। यह स्टेशन महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा पर ठीक आधा-आधा बंटा हुआ है।
कैसे हुआ था बंटवारा
इस रेलवे स्टेशन को जब बनाया गया था, तब मुंबई (बॉम्बे) प्रेसिडेंसी एक ही प्रांत हुआ करती थी। हालांकि, 1 मई 1960 को जब भाषाई आधार पर बॉम्बे का विभाजन कर महाराष्ट्र और गुजरात दो नए राज्य बनाए गए, तो दोनों राज्यों की भौगोलिक सीमा नवापुर स्टेशन के बिल्कुल बीचों-बीच से होकर गुजरी।
इस दौरान प्रशासन ने रेल पटरियों या स्टेशन को शिफ्ट करने के बजाय स्टेशन को वही रहने दिया, जिसके बाद यह स्टेशन दो राज्यों में बंट गया।
कितना बड़ा है नवापुर रेलवे स्टेशन
नवापुर रेलवे स्टेशन की कुल लंबाई लगभग 800 मीटर है। इसका 500 मीटर हिस्सा गुजरात के तापी जिले में आता है, तो 300 मीटर हिस्सा महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में आता है।
महाराष्ट्र में टिकट, तो गुजरात में स्टेशन मास्टर
इस रेलवे स्टेशन पर टिकट बुकिंग काउंटर व रेलवे पुलिस (GRP/RPF) ऑफिस महाराष्ट्र की तरफ है। वहीं, स्टेशन मास्टर का कार्यालय, वेटिंग रूम और शौचालय गुजरात की तरफ है।
रेलवे स्टेशन पर फेमस है यह बेंच
नवापुर रेलवे स्टेशन पर एक विशेष लकड़ी की बेंच रखी है, जिसके बीचों-बीच एक सफेद लाइन खींची गई है। लाइन के एक तरफ लिखा है 'महाराष्ट्र' और दूसरी तरफ 'गुजरात' लिखा है। ऐसे में इस बेंच पर बैठने वाला व्यक्ति एक ही समय पर आधा महाराष्ट्र में और आधा गुजरात में बैठा होता है। यात्री यहां फोटो और सेल्फी खिंचवाने के लिए खासतौर पर रुकते हैं।
चार भाषाओं में होती है अनाउंसमेंट
यह स्टेशन दोनों राज्यों की साझा सांस्कृतिक सीमा पर है, इसलिए यहां ट्रेनों की घोषणाएं हिंदी, अंग्रेजी, मराठी और गुजराती में की जाती हैं।
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