भारत में यदि कुल राज्यों की बात करें, तो इनकी संख्या 28 है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 8 है। इनमें से एक एक राज्य यानि कि राजस्थान उत्तरी और उत्तर-पश्चिम में सबसे लंबी सीमा साझा करने वाला राज्य है। यह पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा साझा करता है।
ऐसे में रणनीतिक रूप से यह राज्य अहम स्थान रखता है और यहां की सीमाओं पर कड़ी चौकसी रहती है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यह कितनी लंबी सीमा साझा करता है और इसकी सीमा कहां से शुरू होकर कहां खत्म होती है। इन सभी सवालों के जवाब को विस्तार से जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
उत्तरी भारत का सबसे लंबी सीमा साझा वाला राज्य
भारत के उत्तरी और उत्तर-पश्चिम दिशा में सबसे लंबी सीमा साझा करने वाला राज्य राजस्थान है। यह राज्य पाकिस्तान के साथ अपनी सबसे लंबी सीमा साझा करता है।
कितनी लंबी है राज्य की सीमा
राजस्थान राज्य पाकिस्तान के साथ कुल 1037 किलोमीटर की लंबी सीमा साझा करता है। इस रेखा को हम रेडक्लिफ नाम से भी जानते हैं। यह रेखा उत्तर में गंगानगर के हिंदूमल से शुरू होकर दक्षिण में बाड़मेर के भलगांव तक है।
राजस्थान के कौन-से जिले पाकिस्तान से लगते हैं
राजस्थान के कुल 6 जिले हैं, जो कि पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करते हैं। इनमें से राजस्थान के दो नए जिले भी हैं, जो कि पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करते हैंः
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श्रीगंगानगर
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अनूपगढ़
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बीकानेर
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फलौदी
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जैसलमेर
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बाड़मेर
सीमा की भौगोलिक चुनौतियां क्या हैं
राजस्थान और पाकिस्तान की सीमा का अधिकांश हिस्सा रेगिस्तानी है।
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यहां बड़े-बड़े रेत के टीले हैं, जिनका आकार हवा से घटता और बढ़ता रहता है।
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गर्मी के मौसम में इस सीमा पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दी में यहां का पारा शून्य तक होता है।
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कई बार यहां रेत के तूफान भी आ जाते हैं, जिससे चौकसी करना मुश्किल होता है।
कौन करता है सुरक्षा
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सीमा की सुरक्षा की सीमा सुरक्षा बल(Border Security Force) के पास है।
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सुरक्षा के लिए यहां कंटीली तारों की बाड़ लगाई गई है।
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सीमा पर रात में निगरानी के लिए यहां बड़ी-बड़ी फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं। ये हाई वोल्टेज लाइट्स होती हैं।
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बीएसएफ के जवान यहां आवाजाही के लिए अपने साथ रेगिस्तानी ऊंट रखते हैं।
सीमा से लगे महत्त्वपूर्ण प्वाइंट्स
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पाकिस्तान की सीमा के पास जैसलमेर में तनोट माता का मंदिर है। यह एक प्रसिद्ध चौकी भी है।
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बाड़मेर में मुनाबाव चौकी प्रसिद्ध चौकियों में शामिल है। यही वजह जगह है, जहां से कभी थार एक्सप्रेस पाकिस्तान के कराची तक जाती थी।
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वर्तमान में जैसलमेर के लोंगेवाला में 1971 की युद्धभूमि को संरक्षित कर रखा गया है। यहां आज भी पाकिस्तानी टैंकों और गाड़ियों को देखा जा सकता है, क्योंकि युद्ध के बाद पाकिस्तानी सेना ने अपने सैन्य वाहनों को यही छोड़ दिया था।
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