22 कोच वाली ट्रेन में कितने डिब्बे AC और कितने Non-AC होते हैं? जानें रेलवे का नियम
रेलवे की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार 22 डिब्बों वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में 12 डिब्बे सामान्य और स्लीपर कैटेगरी के होते हैं। ये सभी नॉन-ऐसी कैटेगरी में आते हैं, जबकि बाकी डिब्बे AC कैटेगरी के होते हैं।
भारतीय रेलवे से रोज करोड़ों लोग सफर करते हैं। ट्रेन में बैठते समय आपने भी गौर किया होगा कि कुछ डिब्बे AC के होते हैं, जबकि कुछ सामान्य और स्लीपर कैटेगरी के होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि 22 डिब्बों वाली एक सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में कितने डिब्बे ऐसी और कितने नॉन ऐसी होते हैं? चलिए इसके बारे में विस्तार से समझते हैं।
रेल मंत्रालय ने लोकसभा में दी गई जानकारी में रेलवे की यात्री क्षमता और डिब्बों से जुड़े कई अहम आंकड़े साझा किए हैं। इसके मुताबिक, 22 डिब्बों वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में 12 सामान्य और स्लीपर कैटेगरी के नॉन-ऐसी डिब्बे रखने का प्रावधान है।
22 डिब्बों में 12 नॉन ऐसी
रेलवे की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार 22 डिब्बों वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में 12 डिब्बे सामान्य और स्लीपर कैटेगरी के होते हैं। ये सभी नॉन-ऐसी कैटेगरी में आते हैं।
बाकी डिब्बे AC के होते हैं। हालांकि, अलग-अलग ट्रेनों की स्ट्रक्चर उनकी जरूरत, मार्ग और यात्रियों की मांग के अनुसार अलग हो सकती है। इसके अलावा रेलवे यात्रियों के लिए बिना आरक्षण वाली यात्री ट्रेन, मेमू और ईएमयू सेवाएं भी चलाता है।
सात साल में 4,105 करोड़ यात्रियों ने किया सफर
रेल मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच भारतीय रेलवे से कुल 4,105 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की।
इनमें करीब 505 करोड़ यात्री आरक्षित श्रेणी के थे, जबकि लगभग 3,600 करोड़ यात्रियों ने बिना आरक्षण यात्रा की। इन आंकड़ों में कोविड महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 भी शामिल हैं।
रेलवे के 70 प्रतिशत डिब्बे नॉन-ऐसी
भारतीय रेलवे के पास करीब 89,000 डिब्बे हैं। इनमें लगभग 62,000 डिब्बे नॉन-ऐसी हैं, यानी कुल डिब्बों का करीब 70 प्रतिशत। वहीं करीब 27,000 डिब्बे AC हैं। सीटों की बात करें तो रेलवे में लगभग 69 लाख सीटें हैं। इनमें करीब 54 लाख सीटें नॉन-AC श्रेणी की हैं, जबकि लगभग 15 लाख सीटें AC में हैं।
17 हजार नए नॉन-ऐसी डिब्बे बनेंगे
यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे सामान्य और नॉन-AC श्रेणी की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में 1,250 सामान्य डिब्बे लंबी दूरी की विभिन्न ट्रेनों में जोड़े गए। वहीं 2025-26 में करीब 870 डिब्बे स्थायी रूप से बढ़ाए गए, जिनमें 160 सामान्य श्रेणी के डिब्बे शामिल थे।
रेलवे ने इसके अलावा 17,000 नए नॉन-AC डिब्बे बनाने का काम शुरू किया है। इससे आने वाले समय में यात्रियों के लिए सीटों की उपलब्धता बढ़ाने और भीड़ कम करने में मदद मिल सकती है।
अमृत भारत से आधुनिक और किफायती सफर
कम और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों के लिए अमृत भारत एक्सप्रेस एक महत्वपूर्ण पहल है। ये पूरी तरह नॉन-ऐसी ट्रेनें हैं। इनमें 11 सामान्य श्रेणी, 8 स्लीपर, 1 रसोईयान और 2 सामान-सह-दिव्यांगजन डिब्बे होते हैं। बात दें कि 30 जून 2026 तक देश में अमृत भारत एक्सप्रेस की 36 जोड़ी सेवाएं संचालित हो रही थीं।
कुल मिलाकर रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय रेल का सबसे बड़ा आधार आज भी सामान्य और नॉन-AC यात्री हैं। ऐसे में 17 हजार नए डिब्बों की योजना आम यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
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