दुनिया में कुल 195 देश हैं, जिनमें कुल 193 देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं, जबकि दो अन्य गैर-पर्यवेक्षक देश हैं। इन सभी देशों की अपनी-अपनी कृषि व्यवस्था है, जो कि संबंधित देशों की कृषि योग्य भूमि पर निर्भर है। हालांकि, दुनिया में सबसे अधिक कृषि योग्य भूमि सिर्फ भारत के पास है। यह आंकड़े SIPRI और FAO की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक हैं।
भारत के पास कितनी है कृषि योग्य भूमि
सबसे पहले हम भारत की कुल कृषि योग्य भूमि के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि भारत के पास 154 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसमें विशाल सिंधु-गंगा के मैदान भी शामिल है।
देश की करीब 40 से 50 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से कृषि क्षेत्र से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि भारत को एक कृषि प्रधान देश भी कहा जाता है। यदि हमें भारत के कुल क्षेत्रफल के हिसाब से देखें, तो भारत का 50 फीसदी से अधिक एरिया कृषि योग्य भूमि के तौर पर है। ऐसे में यह भारत को अन्य देशों से और मजबूत बनाता है।
देश की GDP में कितनी है हिस्सेदारी
भारत में कृषि को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ का अहम हिस्सा माना जाता है। वर्तमान में देश के सकल घरेलु उत्पाद(GDP) में कृषि की 18 से 19 फीसदी तक की हिस्सेदारी है। हालांकि, आजादी से समय यह 50 फीसदी तक हुआ करती थी, लेकिन बाद में सर्विस और विनिर्माण क्षेत्र में विकास की वजह से कृषि की हिस्सेदारी कम हुई है, लेकिन आज भी इसका वैल्यू उतनी ही है।
भारत के प्रमुख कृषि उत्पाद कौन-से हैं
भारत के प्राइमरी कृषि उत्पाद दूध, दाल और मसालें हैं, जिनमें भारत टॉप स्थान पर है। वहीं, चावल, गेहूं, गन्ना, कपास और सब्जियों में भारत का दूसरा स्थान है। इन सभी के बीच भारत बड़ी मात्रा में चावल, चीनी और मसालों का निर्यात करता है।
दूसरे स्थान पर आता है यह देश
दुनिया में कुल कृषि योग्य भूमि के मामले में दूसरे पायदान पर अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश आता है। यहां कुल 152 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इसके मध्य-पश्चिम क्षेत्र में सबसे अधिक अनाज का उत्पादन होता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र को दुनिया में ‘अनाज की टोकरी’ के रूप में भी जाना जाता है।
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