इकलौती राष्ट्रीय पार्टी, जिसने यूपी पर किया राज.. आज विधानसभा से लोकसभा तक नहीं है एक भी सदस्य

Last Updated: Aug 17, 2026, 17:05 IST

बहुजन समाज पार्टी का राजनीतिक आधार पिछले कुछ वर्षों में लगातार कमजोर हुआ है। कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता पर मजबूत पकड़ रखने वाली इस पार्टी का आज यूपी विधानसभा से लेकर लोकसभा तक एक भी सदस्य नहीं है।

कभी यूपी की सत्ता पर था मजबूत दबदबा
कभी यूपी की सत्ता पर था मजबूत दबदबा

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का राजनीतिक आधार पिछले कुछ वर्षों में लगातार कमजोर हुआ है। कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता पर मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी आज विधानसभा से लेकर संसद तक अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। 

उत्तर प्रदेश, जो लंबे समय से बसपा की राजनीति का मुख्य केंद्र रहा है, वहां अब पार्टी का विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है। पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व भी खत्म हो गया। वहीं, यूपी विधान परिषद में भी पार्टी का कोई सदस्य नहीं है। 

संसद में भी सिमटी बसपा की मौजूदगी

2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी। इसके बाद लोकसभा में पार्टी का कोई सांसद नहीं है। फिलहाल बसपा के पास राज्यसभा में सिर्फ एक सदस्य रामजी गौतम हैं। उनका कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने वाला है।

यदि इसके बाद पार्टी राज्यसभा में भी कोई सीट हासिल नहीं कर पाती है, तो बसपा पहली बार संसद के दोनों सदनों में शून्य प्रतिनिधित्व की स्थिति में पहुंच जाएगी। 

मौजूदा स्थिति पर एक नजर 

लोकसभा: 2024 के बाद एक भी सदस्य नहीं

राज्यसभा: रामजी गौतम एकमात्र सांसद, कार्यकाल नवंबर 2026 तक

यूपी विधानसभा: कोई विधायक नहीं 

यूपी विधान परिषद: कोई सदस्य नहीं

क्या 2026 में राज्यसभा में वापसी संभव है? 

मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बसपा के लिए 2026 में राज्यसभा की सीट हासिल करना आसान नहीं दिख रहा है। उत्तर प्रदेश में पार्टी के पास विधानसभा सदस्य नहीं हैं और राज्यसभा चुनाव में सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या जुटाना उसके लिए बड़ी चुनौती है।

ऐसे में संसद में वापसी के लिए बसपा की सबसे बड़ी उम्मीद अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर टिकी दिखाई देती है। 

2027 का चुनाव क्यों है अहम?

यदि बसपा 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में पर्याप्त सीटें जीतने में सफल रहती है, तो उसके लिए आगे राज्यसभा के रास्ते खुल सकते हैं। वहीं, कमजोर प्रदर्शन की स्थिति में पार्टी को 2029 के लोकसभा चुनाव तक संसद में वापसी के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। 

पार्टी के लिए यह सिर्फ चुनावी हार-जीत का सवाल नहीं है, बल्कि लंबे समय में उसके राजनीतिक आधार और राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे को लेकर भी चुनौती बन सकता है। 

2022 से लगातार कमजोर हुआ प्रदर्शन 

बसपा के कमजोर होते जनाधार की तस्वीर पिछले दो विधानसभा चुनावों में साफ दिखाई देती है। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा ने 19 सीटें जीती थीं। लेकिन 2022 में पार्टी सिमटकर सिर्फ एक सीट पर रह गई। 

साल 2022 में बीजेपी ने 255 सीटें जीती थीं, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 111 सीटें आई थीं। बसपा का प्रदर्शन उसके पुराने राजनीतिक प्रभाव की तुलना में बेहद कमजोर रहा।

वर्तमान में मात्र दो BSP विधायक

वर्तमान में देश भर की बात करें तो बसपा के केवल दो विधायक है, जिसमें बिहार में रामगढ़ सीट से वर्तमान विधायक सतीश कुमार यादव और पंजाब में नवांशहर विधानसभा से डॉ. नछत्तर पाल विधायक शामिल है। 

कभी यूपी की सत्ता पर था मजबूत दबदबा 

1984 में गठित बसपा ने उत्तर प्रदेश को ही अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं और एक दौर में पार्टी राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल थी।

लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। यूपी विधानसभा और विधान परिषद में पार्टी का कोई सदस्य नहीं है और लोकसभा में भी बसपा का खाता खाली है। नवंबर 2026 के बाद यदि राज्यसभा में भी कोई सदस्य नहीं बचता है, तो पार्टी की संसद में मौजूदगी पूरी तरह खत्म हो सकती है।

बसपा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ चुनाव जीतना नहीं, बल्कि अपने खोते हुए राजनीतिक आधार को दोबारा मजबूत करना है।

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Aug 17, 2026, 16:25 IST

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