दिल्ली में JLN Stadium को ही बड़े इवेंट्स के लिए क्यों चुना जाता है, जानें कारण

Last Updated: Oct 30, 2026, 13:57 IST

दिल्ली में जब भी कोई बड़ा कंसर्ट होता है, तो जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को ही चुना जाता है। यह स्टेडियम दक्षिणी दिल्ली का प्रमुख स्टेडियम है। बड़े इवेंट में हमेशा इस स्टेडियम को ही क्यों चुना जाता है, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।

जेएलएन स्टेडियम
जेएलएन स्टेडियम

दिल्ली में जब भी कोई बड़ा कंसर्ट या इवेंट होता है, तो दक्षिणी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम को ही चुना जाता है। यह स्टेडियम दिल्ली का प्रमुख स्टेडियम है, जो कि खेलों के साथ-साथ इवेंट्स के लिए भी मशहूर है। यह अपनी बनावट और आर्किटेक्चर के लिए जाना जाता है। हाल ही में यहां दिलजीत दोसांझ, एलन वॉकर और दुआ लीपा जैसे कलाकारों के कॉन्सर्ट हुए हैं, जिसने इसे मेगा इवेंट्स का प्रमुख केंद्र बना दिया है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर क्या वजह है, जिससे इस स्टेडियम को बड़े इवेंट्स के लिए चुना जाता है।

क्रिकेट नहीं, 'मल्टीपरपज' डिजाइन

भारत के ज्यादातर बड़े स्टेडियम जैसे वानखेड़े, ईडन गार्डन्स या नरेंद्र मोदी स्टेडियम मुख्य रूप से क्रिकेट के लिए बने हैं। क्रिकेट की पिच बहुत संवेदनशील होती है, जिसके कारण ग्राउंड के बीच में भारी स्टेज या इवेंट सेटअप करना मुश्किल होता है। इसके उलट, JLN स्टेडियम एक 'मल्टीपरपज एरीना' है।

इसे मुख्य रूप से रनिंग ट्रैक और फुटबॉल के लिए डिजाइन किया गया है। इसके बीच में घास का बड़ा मैदान है और किनारे पर 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रैक है। यह सपाट और बड़ी जगह कॉन्सर्ट स्टेज, लाइट और भारी साउंड सिस्टम लगाने के लिए फिट बैठती है।

60,000 दर्शकों की क्षमता

इस स्टेडियम में एक साथ लगभग 60,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता है। जब यहां कॉन्सर्ट होते हैं, तो बैठने की सीटों के अलावा बीच के ग्राउंड का इस्तेमाल भी लोगों के खड़े होने के लिए किया जाता है। इससे इस स्टेडियम की क्षमता और भी बढ़ जाती है और यह एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ को आसानी से संभाल सकता है।

अनोखी 'कैनोपी' की वास्तुकला

2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) के लिए इस स्टेडियम को पूरी तरह से रेनोवेट किया गया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी अनोखी छत है, जो टेफ्लॉन कोटेड फाइबरग्लास से बनी है। यह छत किसी बड़े तंबू की तरह दिखती है। इसकी वास्तुकला ऐसी है कि स्टेडियम के अंदर छत को सहारा देने के लिए कोई खंभा नहीं है, जिससे दर्शकों को स्टेज या मैदान का बिल्कुल साफ नजारा मिलता है।

शानदार कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर

बड़े इवेंट्स में सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को संभालना होती है। JLN स्टेडियम दिल्ली के बिल्कुल बीचों-बीच स्थित है। इसकी अपनी 'JLN स्टेडियम मेट्रो लाइन यानि कि पर्पल लाइन है, जिससे हजारों लोग बिना ट्रैफिक के सीधे स्टेडियम पहुंच सकते हैं। वहीं, सुरक्षा मानकों के अनुसार, इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपातकालीन स्थिति में पूरे स्टेडियम को केवल 6 मिनट में सुरक्षित रूप से खाली कराया जा सकता है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Oct 30, 2026, 13:57 IST

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