‘यूरोप का रोगी’ दुनिया के किस देश को कहा जाता है, जानें यहां

Last Updated: Oct 30, 2026, 12:49 IST

आपने दुनिया के अलग-अलग देशों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जिसे ‘यूरोप का रोगी’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह देश और क्या है इसे ऐसा कहने के कारण, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। 

तुर्किये
तुर्किये

दुनिया में कुल 195 देश हैं, जिनमें 193 देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं, जबकि 2 गैर-सदस्य देश हैं। आपने दुनिया के अलग-अलग देशों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। प्रत्येक देश की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। कुछ देशों को उनके मूल नाम के अलावा उपनामों से भी जाना जाता है। इस कड़ी में यहां एक देश ऐसा भी है, जिसे ‘यूरोप का रोगी’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह देश, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। 

किस देश को कहा जाता है ‘यूरोप का रोगी’

इतिहास में 'तुर्क साम्राज्य' (Ottoman Empire), जिसे आज हम 'तुर्किये' के रूप में जानते हैं, को ‘यूरोप का मरीज’ या ‘यूरोप का रोगी’ (Sick Man of Europe) कहा जाता था। 

किसने दिया था यह नाम

इस मुहावरे का सबसे पहली बार इस्तेमाल 19वीं सदी के मध्य लगभग 1853 में क्रीमिया युद्ध से ठीक पहले रूस के सम्राट 'जार निकोलस प्रथम' ने किया था। तुर्क साम्राज्य की जर्जर हालत को देखते हुए उन्होंने ब्रिटिश राजदूत से कहा था कि "हमारे हाथों में एक बीमार आदमी है, एक बहुत ही गंभीर रूप से बीमार आदमी, जो कभी भी मर सकता है।"

तुर्किये को क्यों कहा गया ‘यूरोप का रोगी’

15वीं से 17वीं सदी के बीच जब ऑटोमन (तुर्क) साम्राज्य दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति था। इसकी सीमाएं यूरोप, एशिया और अफ्रीका समेत तीनों महाद्वीपों तक फैली हुई थीं। लेकिन, 19वीं सदी आते-आते यह साम्राज्य अपनी अंत तक पहुंच गया था, जिसके कारण इस प्रकार थे:

-साम्राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। यह पश्चिमी देशों ब्रिटेन व फ्रांस के भारी कर्ज में डूब चुका था। कर वसूली सिस्टम भ्रष्ट हो चुका था और खजाना खाली था।

-जब ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में औद्योगिक क्रांति आ रही थी और वे आधुनिक हथियार बना रहे थे, तब तुर्क साम्राज्य पुरानी और रूढ़िवादी व्यवस्थाओं में ही फंसा रहा। इसकी सेना आधुनिक यूरोपीय सेनाओं के सामने बहुत कमजोर हो गई थी।

-अपनी कमजोरी के कारण तुर्क साम्राज्य ने रूस और अन्य यूरोपीय शक्तियों के साथ हुए कई युद्धों में करारी हार का सामना किया। इसके हाथ से ग्रीस, रोमानिया, सर्बिया और बुल्गारिया जैसे यूरोपीय हिस्से एक-एक करके आजाद होने लगे।

-बड़े साम्राज्य को संभालना मुश्किल हो गया था। प्रशासन में भारी भ्रष्टाचार था और साम्राज्य के अधीन रहने वाले विभिन्न समुदायों में राष्ट्रवाद था, जिससे लगातार आंतरिक विद्रोह हो रहे थे।

‘मरीज’ की मौत और नए देश का जन्म

पूरा यूरोप इस बात का इंतजार कर रहा था कि यह तुर्क साम्राज्य कब खत्म हो, ताकि वे इसकी संपत्तियों और भू-भाग को आपस में बांट सकें। आखिर में प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में हार के बाद यह साम्राज्य पूरी तरह से ढह गया और इसके टुकड़े कर दिए गए। इसके बाद मुस्तफा कमाल अतातुर्क के नेतृत्व में एक क्रांति हुई और साम्राज्य से नए 'तुर्की गणराज्य' का जन्म हुआ, जिसने इस 'रोगी' वाली छवि को हमेशा के लिए मिटा दिया।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Oct 30, 2026, 12:49 IST

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