उत्तर प्रदेश का वह जिला, जिसे कहा जाता है ‘बुनकरों का शहर’
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें एक जिला ऐसा भी है, जिसे पूरे यूपी में ‘बुनकरों का शहर’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह जिला और क्या है जिले की विशेषताएं, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जो कि अपनी विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां कुल 75 जिले हैं, जो कि 18 मंडलों में आते हैं। इन सभी जिलों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। इस कड़ी में यहां एक जिला ऐसा भी है, जिसे यूपी में ‘बुनकरों का शहर’ भी कहा जाता है। कौन-सा है यह जिला, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
उत्तर प्रदेश का परिचय
उत्तर प्रदेश राज्य का गठन 24 जनवरी, 1950 को किया गया था। इससे पहले इसे संयुक्त प्रांत नाम से जाना जाता था। संयुक्त प्रांत से पहले इसका नाम उत्तर-पश्चिम प्रांत हुआ करता था, जो कि समय-समय पर बदलता रहा। राज्य में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 351 तहसील हैं। इसके अलावा यहां कुल 75 नगर पंचायत, 28 विकास प्राधिकरण, 17 नगर निगम और 5 विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण हैं।
किस जिले को कहा जाता है ‘बुनकरों का शहर’
अब हम यह जान लेते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘बुनकरों का शहर’ भी कहा जाता है, तो आपको बता दें कि यह यूपी का मऊ जिला ‘बुनकरों का शहर’ यानि City of Weavers के नाम से जाना जाता है।
क्यों कहा जाता है ‘बुनकरों का शहर’
मऊ जिला पूर्वांचल क्षेत्र का एक प्रमुख कपड़ा और हस्तशिल्प केंद्र है। इसे 'बुनकरों का शहर' कहने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
-मऊ की एक बड़ी आबादी हथकरघा और पावरलूम उद्योग पर निर्भर है।
-यहां बनने वाली सूती, सिल्क और सिंथेटिक साड़ियां, लूंगी, ड्रेस मटेरियल और थान के कपड़े न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत और पड़ोसी देश नेपाल तक सप्लाई किए जाते हैं।
-यहां के बुनकर पीढ़ियों से बुनाई के काम में महारत रखते हैं और मऊ का बाजार उत्तर प्रदेश के बड़े कपड़ा बाजारों में से एक माना जाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर इस जिले की होती है पहचान
आपको बता दें कि देशभर में राष्ट्रीय स्तर पर बात करें, तो भारत में 'बुनकरों का शहर' हरियाणा के पानीपत को कहा जाता है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर यह उपनाम मऊ जिले के नाम है।
उत्तर प्रदेश के अन्य प्रसिद्ध 'बुनकरी केंद्र'
उत्तर प्रदेश में कपड़ा व बुनाई उद्योग के क्षेत्र में केवल मऊ ही नहीं, बल्कि कई अन्य जिले भी अपनी पहचान रखते हैं। इनमें वाराणसी की साड़ियां, भदोही की कालीन बुनाई और सीतापुर की दरी बुनाई फेमस है।
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.