ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया एक कथित बड़े पैमाने का सैन्य अभियान बताया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना है। इस ऑपरेशन में एयरस्ट्राइक, नौसैनिक हमले और रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शामिल बताया गया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब परमाणु वार्ताएं ठप पड़ गईं।
क्या है ऑपरेशन एपिक फ्यूरी?
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2026 में संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किया गया कथित सैन्य अभियान है, जिसका उद्देश्य उसकी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना तथा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को नियंत्रित करना है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी हाई लाइट्स
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को कमजोर करना था। इसके तहत:
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सैन्य कमांड और कंट्रोल सेंटर पर हमले
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मिसाइल लॉन्च साइट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करना
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रणनीतिक सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना
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क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को कम करना
अमेरिकी नेतृत्व ने इसे “प्रिवेंटिव स्ट्राइक” यानी खतरे को पहले ही खत्म करने की रणनीति बताया।
ईरान की जवाबी कार्रवाई:
हमलों के जवाब में ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने जवाबी ऑपरेशन शुरू किया, जिसे “Operation Roaring Lion” या समान प्रतिक्रिया अभियानों के रूप में बताया जा रहा है।
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बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमले
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कतर में Al Udeid Air Base जैसे अमेरिकी ठिकानों को निशाना
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इराक के सैन्य बेस पर हमले
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इज़राइल के शहरों पर मिसाइल हमलों की कोशिश
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
हवाई क्षेत्र पर असर: मध्य पूर्व के कई देशों में हवाई क्षेत्र आंशिक या पूर्ण रूप से बंद हो गया। वहीं दुबई और दोहा जैसे बड़े एयर हब में सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द हुईं।
तेल और व्यापार पर असर
Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने से:
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वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा
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तेल की कीमतों में तेज उछाल
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अंतरराष्ट्रीय शिपिंग प्रभावित
सैन्य तनाव
United States Fifth Fleet को समुद्री मार्ग सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय किया गया, जिससे फारस की खाड़ी में टकराव का खतरा बढ़ गया।
साइबर ऑपरेशन वाला दावा:
कुछ स्रोतों में “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को एक साइबर ऑपरेशन भी बताया गया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा हैकर नेटवर्क को निशाना बनाना, मैलवेयर सर्वर को “सिंकहोल” करना और क्रिप्टो वॉलेट फ्रीज करना है. लेकिन यह विवरण पारंपरिक सैन्य अभियान से अलग संदर्भ का लगता है और दोनों को मिलाना भ्रम पैदा करता है।
वर्तमान स्थिति (संघर्ष का परिदृश्य)
क्षेत्र में तनाव अत्यधिक बढ़ा हुआ है और प्रत्यक्ष युद्ध का खतरा बना हुआ है. वैश्विक शक्तियाँ स्थिति को कूटनीतिक तरीके से संभालने की कोशिश कर रही है, साथ ही ऊर्जा, सुरक्षा और भू-राजनीति पर व्यापक असर दिख रहा है
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को लेकर उपलब्ध जानकारी मिश्रित और आंशिक रूप से अपुष्ट है। इसे मुख्य रूप से एक संभावित/रिपोर्टेड सैन्य अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जबकि साइबर ऑपरेशन वाला विवरण अलग ऑपरेशन हो सकता है।
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