भारत के मध्यकाल का इतिहास उठाकर देखें, तो हमें मुगलों का लंबा इतिहास देखने को मिलता है। दिल्ली सल्तनत के बाद भारत में मुगलों का शासन स्थापित हुआ करीब 331 सालों तक चला। इसके बाद सत्ता की डोर पूरी तरह ब्रिटिश के हाथों में आ गई। मुगल सम्राटों ने अपने शासनकाल में भव्य इमारतों के निर्माण से लेकर शासन व्यवस्था बनाई।
अपनी विशेषताओं की वजह से कुछ मुगल शासकों को एक विशेष उपाधि भी दी गई थी। इनमें से एक मुगल शासक ऐसे भी रहे हैं, जिन्हें ‘कलंदर’ नाम से जाना जाता था। कौन थे यह मुगल शासक, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किसने की थी मुगल सम्राज्य की स्थापना
मुगल सम्राज्य की स्थपाना बाबर ने की थी। बाबर का पूरा नाम जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर था। उन्होंने 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में दिल्ली सल्तनत के आखिरी शासक रहे इब्राहिम लोदी को हराया था। इस जीत के बाद बाबर ने आगरा स्थित लोदी के किले पर कब्जा कर मुगल सम्राज्य की स्थापना की थी।
किस मुगल शासक को कहा जाता था 'कलंदर'
अब सवाल है कि आखिर किस मुगल शासक को 'कलंदर' कहा जाता था आपको बता दें कि मुगल सम्राज्य की स्थापना करने वाले बाबर को ही 'कलंदर' कहा जाता था।
क्यों कहा जाता था 'कलंदर'
बाबर को कलंदर कहने के पीछे उनकी उदारता और दानशीलता बड़ा कारण मानी जाती थी, जो कि इस प्रकार हैः
सैनिकों में बांटा खजाना
ऐसा कहा जाता है कि पानीपत का युद्ध जीतने के बाद बाबर को दिल्ली और आगरा से बहुत खजाना मिला था। इस खजाने को बाबर द्वारा अपने सैनिकों और संबंधियों में बांट दिया गया था।
काबुल में भेजा था उपहार
बाबर को लेकर कहा जाता है कि उन्हें अपने पैतृक स्थान यानि कि काबुल से बहुत लगाव था। उन्होंने अपनी जीत के बाद चांदी के सिक्कों को काबुल में बंटवाया था।
क्या होता है 'कलंदर' का अर्थ
'कलंदर' शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उन सूफी-संतों और फकीरों के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें मोह-माया और धन का कोई लालच नहीं होता था। बाबर द्वारा दिल्ली जीतने के बाद जब सारा धन लुटा दिया गया, तो उनकी उदारता को देखते हुए लोगों द्वारा उन्हें कलंदर की उपाधि दी गई थी।
कब हुई बाबर की मृत्यु
बाबर ने सिर्फ 4 सालों तक ही शासन किया था। दिसंबर, 1530 में बाबर की मृत्यु हो गई थी। हुमायूंनामा के मुताबिक, इब्राहिम लोदी की मां ने बाबर के रसोइये के साथ मिलकर उनके खाने में धीमा जहर दिया था, लेकिन वह इससे बच गए थे। हालांकि, उनके आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचा था। बाद में लगातार युद्ध और गर्मी की वजह से स्वास्थ्य गिरने लगा, जिसके बाद बाबर की मृत्यु हो गई थी।
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