भारत में किस पर्व को ‘त्योहारों का त्योहार’ कहा जाता है, जानें यहां
भारत को त्योहारों का त्योहार कहा जाता है। यहां पूरे साल देश के अलग-अलग राज्यों में हमें विभिन्न त्योहार देखने को मिलते हैं। इस कड़ी में यहां एक त्योहार ऐसा भी है, जिसे ‘त्योहारों का त्योहार’ कहा जाता है।
भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। यहां पूरे साल देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं, जो कि अलग-अलग धर्म, जाति और संस्कृति से जुड़े हुए हैं। इस कड़ी में यहां एक त्योहार ऐसा भी है, जिसे ‘त्योहारों का त्योहार’ भी कहा जाता है। यह भारत का बहुत ही प्रसिद्ध त्योहार है। यदि आप दिवाली के बारे में सोच रहे हैं, तो आपका जवाब गलत है। इस लेख में हम इस बारे में जानेंगे।
किस पर्व को ‘त्योहारों का त्योहार’ कहते हैं
भारत के पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में हर साल आयोजित होने वाले 'हॉर्नबिल फेस्टिवल' (Hornbill Festival) को पूरी दुनिया में 'त्योहारों का त्योहार' कहा जाता है। यह उत्सव नागालैंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं, लोक कलाओं और संगीत का सबसे बड़ा और जीवंत महाकुंभ कहलाता है।
क्यों पड़ा हॉर्नबिल नाम?
इस महोत्सव का नाम 'हॉर्नबिल' (धनेश) पक्षी के नाम पर रखा गया है। नागालैंड की विभिन्न जनजातियों की लोककथाओं, गीतों और नृत्यों में इस पक्षी का अधिक सम्मान किया जाता है। यह पक्षी नागा समाज में बहादुरी, पवित्रता और सुंदरता का प्रतीक माना जाता है।
कब मनाया जाता है त्योहार
हॉर्नबिल फेस्टिवल का आयोजन हर साल 1 से 10 दिसंबर तक किया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2000 में नागालैंड सरकार के पर्यटन और कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा की गई थी। इस बड़े आयोजन का मुख्य केंद्र राजधानी कोहिमा से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित 'किसामा हेरिटेज विलेज' होता है।
क्यों कहते हैं 'त्योहारों का त्योहार'?
नागालैंड में अंगामी, एओ, कोन्याक, सेमा और लोथा सहित 16 से अधिक प्रमुख जनजातियां निवास करती हैं। हर जनजाति का अपना अलग इतिहास, वेशभूषा, भाषा और साल के अलग-अलग समय पर मनाए जाने वाले कृषि त्योहार होते हैं।
इन सभी अलग-अलग त्योहारों और संस्कृतियों को एक ही मंच पर एक साथ मनाने के कारण ही इसे 'त्योहारों का त्योहार' कहा जाता है। यह महोत्सव सभी जनजातियों को एक मंच पर लाता है। यह आयोजन उनके बीच आपसी भाईचारे को बढ़ावा देता है और नागालैंड की सामूहिक पहचान को मजबूत करता है।
हॉर्नबिल फेस्टिवल के प्रमुख आकर्षण
किसामा विलेज में हर जनजाति का अपना एक पारंपरिक 'मोरुंग' बनाया जाता है, जहां वे अपनी जीवनशैली और वास्तुकला का प्रदर्शन करते हैं। योद्धाओं के वेश में सजे नागा लोग अपने जानवरों के सींगों और पीतल की खोपड़ियों वाले पारंपरिक आभूषणों के साथ युद्ध नृत्य और लोकगीत पेश करते हैं।
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