किस देश को कहा जाता है ‘हिमालय की संतान’, जानें यहां
हिमालय की गोद और इसके आसपास कई देश बसे हुए हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि किस देश को ‘हिमालय की संतान’ कहा जाता है। यदि आप नहीं जानते हैं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
हिमालय की गोद और इसके आसपास कई देश मौजूद हैं। ये सभी देश अपने सुंदर प्राकृतिक नजारों और ऊंची-ऊंची चोटियों के लिए जाने जाते हैं। इस कड़ी में क्या आप जानते हैं कि हिमालय की गोद में बसा एक देश ऐसा भी है, जिसे ‘हिमालय की संतान’ कहा जाता है। कौन-सा है यह देश और क्या है इसे ऐसा कहने का कारण, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
किस देश को कहा जाता है ‘हिमालय की संतान’
अब हम यह जान लेते हैं कि किस देश को ‘हिमालय की संतान’ कहा जाता है। आपको बता दें कि भारत के पड़ोसी देश यानि कि नेपाल को ‘हिमालय की संतान’ कहा जाता है। यह देश न केवल भौगोलिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और आर्थिक रूप से भी पूरी तरह हिमालय की गोद में बसा हुआ है।
नेपाल है दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों का घर
नेपाल का लगभग 75 फीसदी भूभाग पहाड़ों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। पूरी दुनिया में 8,000 मीटर से ऊंची कुल 14 पर्वत चोटियां हैं, जिनमें से 8 चोटियां अकेले नेपाल में स्थित हैं। इनमें दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट और ल्होत्से व मकालू जैसी बड़ी चोटियां शामिल हैं।
नई नदियों का होता है उद्गम
हिमालय के ग्लेशियर नेपाल के लिए जीवन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। कोसी, गंडकी और कर्णाली जैसी बड़ी नदियां इन्हीं हिमालयी ग्लेशियरों से निकलती हैं। ये नदियां न केवल नेपाल के तराई क्षेत्रों को उपजाऊ बनाती हैं, बल्कि आगे जाकर भारत में गंगा नदी तंत्र बनाती हैं।
आध्यात्मिक और धार्मिक जुड़ाव
हिमालय को हिंदू और बौद्ध धर्म में बहुत पवित्र माना गया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, हिमालय भगवान शिव का निवास स्थान है और नेपाल में पशुपतिनाथ और मुक्तिनाथ जैसे पुराने मंदिर इसी आस्था का केंद्र हैं। इसके अलावा, भगवान बुद्ध का जन्म भी नेपाल के लुंबिनी में हुआ था, जो हिमालय की तलहटी में स्थित है। हिमालय के शांत और आध्यात्मिक वातावरण ने ही नेपाल को योग, ध्यान और शांति का केंद्र बनाया है।
अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार
नेपाल की अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर करता है और इस पर्यटन का मुख्य आकर्षण हिमालय ही है। हर साल दुनिया भर से लाखों पर्वतारोही और पर्यटक एवरेस्ट बेस कैंप, अन्नपूर्णा सर्किट और अन्य हिमालयी ट्रैकिंग मार्गों पर आते हैं। यहां का प्रसिद्ध 'शेर्पा' समुदाय हिमालय की दुर्गम परिस्थितियों में जीवन जीने का प्रतीक है।
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