उत्तराखंड में अब हर परिवार को मिलेगी नई डिजिटल पहचान, राज्य में इतने साल से रह रहे लोगों के लिए भी मौका

Last Updated: Nov 4, 2026, 10:49 IST

उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में देवभूमि परिवार पोर्टल लॉन्च किया। इसके तहत राज्य में रहने वाले हर परिवार का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। राज्य में 15 साल से अधिक समय से रह रहे लोगों की भी इसका लाभ मिलेगा।  

निजी डेटा की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान
निजी डेटा की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान

सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब बार-बार डाक्यूमेंट्स जमा करने और अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो सकती है। उत्तराखंड सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में देवभूमि परिवार पोर्टल लॉन्च किया। इसके तहत राज्य में रहने वाले हर परिवार का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। 

बता दें कि परिवार के सभी सदस्यों की डिटेल्स एक ही Family ID से लिंक होगी। खास बात यह है कि इसका लाभ केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों को ही नहीं, बल्कि पिछले 15 साल से राज्य में रह रहे लोगों को भी मिलेगा। 

राज्य में 15 साल से अधिक समय से रह रहे लोगों की भी इसका लाभ मिलेगा, यानी ऐसे लोग भी अपनी डिजिटल पहचान बनवा सकते है जो राज्य में 15 साल से अधिक समय से रह रहे है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आएगी।

क्या है देवभूमि परिवार ID और कैसे करेगी काम?

देवभूमि परिवार ID एक तरह की डिजिटल पहचान होगी, जिसके माध्यम से राज्य के प्रत्येक परिवार का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें परिवार के सभी सदस्यों की डिटेल्स एक ही ID से जोड़ी जाएगी। इससे परिवार की पहचान, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभों का विवरण एक जगह उपलब्ध रहेगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अलग-अलग सरकारी विभागों को लाभार्थियों की जानकारी जुटाने के लिए बार-बार डाक्यूमेंट्स और दूसरे रिकॉर्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। विभाग आपस में डेटा साझा कर सकेंगे, जिससे सरकारी कामकाज आसान होगा।

15 साल से उत्तराखंड में रह रहे लोगों को भी मिलेगा फायदा

देवभूमि परिवार ID की खास बात यह है कि इसके लिए पात्रता केवल राज्य के मूल निवासियों तक सीमित नहीं रखी गई है। उत्तराखंड में पिछले 15 वर्षों से रह रहे नागरिक भी इस व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।

यानी ऐसे परिवार, जो लंबे समय से उत्तराखंड में रह रहे हैं और यहां की सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, उन्हें भी इस डिजिटल पहचान से जोड़ा जाएगा।

तत्कालीन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद देवभूमि परिवार अधिनियम, 2026 लागू हो चुका है। इसी के तहत अब परिवारों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा।

बार-बार डाक्यूमेंट्स जमा करने की झंझट होगी कम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकारी कामकाज के दौरान लोगों को अक्सर एक ही तरह के डाक्यूमेंट्स बार-बार जमा करने पड़ते हैं। वहीं प्रमुख सचिव (योजना) आर. मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, इस पोर्टल से सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग बेहतर होगी। 

देवभूमि परिवार ID के फायदे

सरकारी योजनाओं के लिए बार-बार डाक्यूमेंट्स जमा करने की जरूरत कम होगी।

सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।

परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी एक ही आईडी में उपलब्ध होगी।

निजी डेटा की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान

परिवारों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड एक जगह तैयार होने से डेटा सिक्योरिटी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। नागरिकों की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल न हो, इसके लिए कानून में सख्त प्रावधान किए गए हैं।

देवभूमि परिवार अधिनियम के तहत डेटा में सेंधमारी करने वालों को 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने की सजा हो सकती है।

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Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Nov 4, 2026, 09:59 IST

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