IAS Divya Tanwar cracking UPSC Two Times: दिव्या तंवर हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की रहने वाली है। बचपन में ही उनके पिता की मृत्यु हो चुकी है। दिव्या की मां उनके लिए ढाल बनकर खड़ी रही। उन्होंने खेतों में काम करके परिवार को पालन पोषण किया। बचपन में दिव्या ने काफी गरीबी देखी है और संघर्षों से जूझते हुए दिव्या ने जीवन में कुछ बड़ा करने का ठान लिया।
दिव्या तंवर की स्कूली शिक्षा
आईएएस दिव्या तंवर ने अपनी स्कूली एजुकेशन महेंद्रगढ़ में स्थित नवोदय विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। दिव्या ने अपनी ग्रेजुएशन साइंस से पूरी की। बाद में अपने घर के हालात को सुधारने के लिए दिव्या ने यूपीएससी की तैयारी करनी शुरू कर दी।
21 की उम्र में बनी IPS
दिव्या ने सिविल सेवा की परीक्षा दी और अपने पहले ही प्रयास में वह आईपीएस बन गई। 21 की उम्र में वह आईपीएस बनी। यूपीएससी में उनकी 438वीं रैंक आई थी। दिव्या तब भी नहीं रुकी। फिर से उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा दी और 105वीं रैंक के साथ 23 की उम्र आईएएस बन गई। दिव्या ने पूरा का पूरा इतिहास बदलकर रख दिया।
IAS और IPS बनने से गांव में खुशी का माहौल
दिव्या तंवर के पहली बार में आईपीएस और दूसरी बार में आईएएस बनने से उनके गांव में खुशी का माहौल है। वह अपने परिवार के लिए एक योद्धा बनकर उभरी। एक ऐसी योद्धा, जिसने अपनी मेहनत के बूते वो मुकाम बनाया, जहां लोग एक टाइम के बाद रुक जाते हैं। मन में कहते हैं कि हमें इससे ज्यादा नहीं चाहिए।
दिव्या तंवर को मिली मां से प्रेरणा
दिव्या तंवर कहती है कि आज मैं जिस भी मुकाम पर खड़ी हूं, उसमें सबसे बड़ा हाथ मेरी मां का है। उन्होंने ही मुझे मेहनत करते रहने की प्रेरणा दी। दिव्या कहती है कि मेरा मां ने कभी मेरा हौसला टूटने नहीं दिया। जीवन में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। अगर मेहनत सच्ची हो। इसका जीता जागता उदाहरण खुद दिव्या तंवर हैं।
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