आज हर भारतीय करेंसी नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर है। लेकिन, इस जाने-पहचाने चेहरे तक का सफर इतिहास से भरा है, जिसमें औपनिवेशिक शासकों से लेकर राष्ट्रीय प्रतीकों तक की कहानी शामिल है। गांधी से पहले भारतीय मुद्रा पर किसकी तस्वीर थी, यह जानने के लिए आगे पढ़ें।
किंग जॉर्ज पंचम
1947 से पहले भारत के करेंसी नोटों पर उस समय के ब्रिटिश शासक की तस्वीर होती थी। शुरू में किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर छापी गई और बाद में किंग जॉर्ज षष्ठम की। ये नोट रंगीन होते थे, इनमें बारीक डिजाइन बने होते थे और इन्हें इंग्लैंड से मंगाए गए अच्छी क्वालिटी के कागज पर छापा जाता था।
ब्रिटिश काल में डिजाइन और सुरक्षा विशेषताएं
ब्रिटिश काल के नोटों पर जटिल पैटर्न, शाही मुहरें और आधिकारिक प्रतीक बने होते थे। हर मूल्य के नोट का अपना अलग रंग और डिजाइन होता था, जो उन्हें उस समय के लिए खास बनाता था।
भारतीय रिजर्व बैंक
1947 में भारत ने मुद्रा से ब्रिटिश शासक की तस्वीर हटा दी। भारतीय रिजर्व बैंक ने नए डिजाइन पेश किए, जिनमें अशोक के सिंह स्तंभ, खेती से जुड़े चित्र और सांस्कृतिक स्थलों को जगह दी गई। इस दौरान किसी भी इंसान की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं किया गया।
गांधी की तस्वीर क्यों चुनी गई
1996 में RBI ने 'महात्मा गांधी सीरीज' शुरू की। गांधीजी को इसलिए चुना गया, क्योंकि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अहम भूमिका थी। उन्हें पूरे देश में पहचान मिली हुई थी और वह शांति के एक वैश्विक प्रतीक थे।
भारत में गांधीजी वाले पहले नोट
गांधी सीरीज के पहले नोट 10 रुपये और 500 रुपये के थे। बाद में सभी करेंसी नोटों पर यही स्टाइल अपनाया गया। इसमें सामने गांधीजी की तस्वीर और पीछे की तरफ विषय-आधारित डिजाइन होते थे।
भारतीय मुद्रा के इतिहास से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें
-भारत में सबसे पुराने बैंकनोट– भारत में पहली बार कागजी मुद्रा 1861 में ब्रिटिश सरकार द्वारा जारी की गई थी।
-दशकों तक किसी इंसान की तस्वीर नहीं– 1947 और 1996 के बीच किसी भी भारतीय व्यक्ति की तस्वीर किसी भी करेंसी नोट पर नहीं छपी।
-विशेष स्मारक नोट– RBI ने खास मौकों के लिए कभी-कभी स्मारक नोट भी जारी किए हैं, जैसे कि भारत की 75वीं स्वतंत्रता दिवस के लिए 75 रुपये का नोट।
-सबसे लंबी चलने वाली सीरीज– महात्मा गांधी सीरीज लगभग तीन दशकों से उपयोग में है, जो इसे भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाला करेंसी डिजाइन बनाती है।
-भाषा पैनल– हर भारतीय करेंसी नोट के पीछे की तरफ 15 आधिकारिक भाषाओं में उसका मूल्य लिखा होता है। इसके अलावा, सामने की तरफ हिंदी और अंग्रेजी में भी लिखा होता है।
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