भारतीय रेलवे को देश की आर्थिक रीढ़ कहा जाता है, जिससे प्रतिदिन करोड़ों यात्री 7 हजार से अधिक स्टेशनों से गुजरते हुए अपनी मंजिलों तक पहुंचते हैं। वर्तमान में पूरे भारत में भारतीय रेलवे का नेटवर्क फैला हुआ है, लेकिन अभी भी एक राज्य ऐसा है, जहां रेल सेवा उपलब्ध नहीं है। यहां रेलवे का काम चल रहा है, लेकिन एक भी रेलवे लाइन सक्रिय नहीं है। कौन-सा है यह राज्य, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस राज्य में नहीं है रेल सेवा
भारत में वर्तमान में सिक्किम एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां एक भी सक्रिय रेलवे लाइन नहीं है। हालांकि, इस राज्य में रेलवे लाइन और स्टेशन बनाने का काम तेजी से चल रहा है।
सिक्किम में क्यों नहीं है रेल सेवा
सबसे पहले हम सिक्किम के इतिहास के बारे में जान लेते हैं। आपको बता दें कि सिक्किम 1975 में भारत का हिस्सा बना था। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां बाकी राज्यों से अलग है। राज्य में ऊंचे पहाड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्ते हैं, जिससे भूस्खलन होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में इस राज्य में अभी तक रेल सेवा उपलब्ध नहीं हुई है।
कैसे पहुंचते हैं सिक्किम
यदि किसी व्यक्ति को सिक्किम जाना होता है, तो उसे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी या फिर जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशनों पर उतरना होता है। यहां उतरने के बाद सड़क मार्ग NH-10 के माध्यम से सिक्किम पहुंचा जाता है।
इस रेल परियोजना पर चल रहा है काम
सिक्किम में वर्तमान में शिवोक-रंगपो रेल परियोजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना की कुल लंबाई 45 किलोमीटर है, जो कि पश्चिम बंगाल के शिवोक को सिक्किम के रंगपो से जोड़ेगा। परियोजना की विशेषता की बात करें, तो इस पूरी परियोजना में 80 फीसदी से अधिक रास्ता सुरंगों में तय होगा। इस दौरान 14 सुरंग और कई बड़े पुल बनाए गए हैं।
दो चरणों में होगा काम
रेल परियोजना का काम दो चरणों में हो रहा है। पहले चरण में पश्चिम बंगाल को सिक्किम से जोड़ा जाएगा। वहीं, दूसरे चरण में सिक्किम के रंगपो को राज्य की राजधानी यानि कि गंगटोक से जोड़ने की योजना है।
इससे सिक्किम में यातायात की समस्या का हल होगा और लोगों का एक बड़ा वर्ग ट्रेन के माध्यम से दूसरे राज्यों में पहुंच सकेगा, जबकि वर्तमान में सिर्फ सड़क मार्ग ही उपलब्ध है। आपको बता दें कि इस वर्ष सरकार की ओर से मेली से देंतम तक रेलवे लाइन के सर्वे को मंजूरी दी गई थी।
रैक और पीनियन तकनीक का इस्तेमाल
जब बात पहाड़ों पर रेल लाइन की हो रही, तो आपका रैक और पीनियन तकनीक को समझना भी जरूरी है। इस तकनीक में दो पटरियों के बीच एक तीसरी पटरी बिछाई जाती है, जिसमें दांत लगे हुए होते हैं, जिसे रैक कहा जाता है।
वहीं, लोकोमोटिव के नीच एक पीनियन पहिया होता है, जो कि इस रैक में फंसकर चलता है। इससे चढ़ाई के दौरान ट्रेन के पीछे आने का खतरा नहीं रहता है। यह व्यवस्था तमिलनाडू में नीलगिरी माउंटेन रेलवे द्वारा पहाड़ियों में उपयोग की जाती है।
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