Nobel Prize in Medicine 2026: इस साल का मेडिसिन का नोबेल प्राइज किन 3 वैज्ञानिकों को मिला? देखें नाम

Last Updated: Oct 5, 2026, 17:15 IST

Nobel Prize in Physiology or Medicine 2026: मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार 2026 पाने वाले तीनों वैज्ञानिकों के रिसर्च के कारण अब दिमाग में उठने वाली भावनाओं और साइक्रेटिक डिसऑर्डर का पता लगाना आसान हो गया है। साथ ही, जानें किन-किन वैज्ञानिकों को नोबेल प्राइज मिला।

Nobel Prize in Physiology or Medicine 2026
Nobel Prize in Physiology or Medicine 2026

2026 Nobel Prize for Physiology or Medicine Announced: फिजियोलॉजी या मेडिसिन क्षेत्र के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार 2026 की घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को कर दी गई है। इस साल यह सम्मान संयुक्त रूप से अमेरिकी वैज्ञानिक कार्ल डाइसेरोथ (Karl Deisseroth), जर्मन वैज्ञानिक पीटर हेगमैन (Peter Hegemann) और जॉर्ज नागेल (Georg Nagel) को प्रदान किया गया है।

इन तीनों वैज्ञानिकों को ‘लाइट-गेटेड आयन चैनलों (Light-gated Ion Channels) और ऑप्टोजेनेटिक्स (Optogenetics) से जुड़ी खोजों’ के लिए इस सर्वोच्च प्राइज से सम्मानित किया गया है। इस तकनीक ने न्यूरोसाइंस (तंत्रिका विज्ञान) के क्षेत्र में बदलाव ला दिए है, जिससे अब वैज्ञानिक प्रकाश की किरणों (Light Rays) का उपयोग करके जीवित दिमाग के अंदर विशिष्ट तंत्रिका कोशिकाओं (Neurons) को ऑन (On) या ऑफ (Off) कर सकते हैं।

3 वैज्ञानिकों ने मॉडल में क्या किया? 

फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2026 का नोबेल पुरस्कार 'ऑप्टोजेनेटिक्स' के लिए दिया गया है।  यह एक ऐसी तकनीक है, जिससे यह पता लगाना संभव हो गया है कि जिंदा मनुष्य के दिमाग में तंत्रिका कोशिकाएं (Nerve Cells) यादों, भावनाओं और व्यवहारों को कैसे आकार देती हैं। साथ ही, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल ने इस मॉडल में एक कोशिकीय शैवाल (Single-Celled Alga) में 'चैनलरोडोप्सिन' (Channelrhodopsin) नामक एक अद्भुत प्रोटीन की खोज की है।  

साथ ही, कार्ल डेइसेरोथ ने इस प्रोटीन को तंत्रिका कोशिकाओं के लिए प्रकाश-नियंत्रित स्विच में बदल दिया है। इन पुरस्कार विजेताओं ने न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में एक नए युग की नींव रखी है। 

ऑप्टोजेनेटिक्स (Optogenetics) क्या है और यह क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

मानव का दिमाग अरबों तंत्रिका कोशिकाओं (Neurons) का एक जटिल जाल होता है। साथ ही,  20वीं सदी तक यह समझना बेहद मुश्किल था कि कौन सी विशिष्ट कोशिकाएं हमारी भावनाओं, व्यवहारों, और शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं।

  • पारंपरिक तरीकों की सीमाएं: पहले जब वैज्ञानिक मस्तिष्क के किसी हिस्से को समझने के लिए विद्युत उद्दीपन (Electrical Stimulation) या रसायनों का प्रयोग करते थे, तो उस क्षेत्र की आसपास की सभी कोशिकाएं एक साथ प्रभावित हो जाती थीं। इससे सटीक कारण और प्रभाव (Causal Relationship) का पता लगाना असंभव था।
  • ऑप्टोजेनेटिक्स का जादू: 'ऑप्टोजेनेटिक्स' दो शब्दों से मिलकर बना है— ऑप्टिक्स (Optics - प्रकाश) और जेनेटिक्स (Genetics - आनुवंशिकी)। इस तकनीक के तहत जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा तंत्रिका कोशिकाओं में प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन (Light-sensitive Proteins) डाले जाते हैं। इसके बाद, नीली या अन्य रंगीन लेजर लाइट डालकर सिर्फ चुनिंदा न्यूरॉन्स को स्विच की तरह चालू या बंद किया जा सकता है।

तीनों नोबेल विजेताओं का मुख्य योगदान

वैज्ञानिक का नाम 

देश / संस्थान 

मुख्य योगदान 

पीटर हेगमैन (Peter Hegemann)

जर्मनी (Humboldt University, Berlin)

एककोशिकीय शैवाल (Chlamydomonas reinhardtii) में चैनलरोडोप्सिन (Channelrhodopsin) प्रोटीन की खोज की, जो प्रकाश से एक्टिव होता है।

जॉर्ज नागेल (Georg Nagel)

जर्मनी (University of Würzburg)

पीटर हेगमैन के साथ मिलकर यह साबित किया कि चैनलरोडोप्सिन एक लाइट-गेटेड आयन चैनल के रूप में कार्य करता है और अन्य कोशिकाओं को प्रकाश-संवेदनशील बना सकता है।

कार्ल डाइसेरोथ (Karl Deisseroth)

अमेरिका (Stanford University)

चैनलरोडोप्सिन के जीन को स्तनधारियों (जैसे चूहों) की तंत्रिका कोशिकाओं में ट्रांसफ्यूज कर ऑप्टोजेनेटिक्स (Optogenetics) की पूरी कार्यप्रणाली और व्यावहारिक तकनीक विकसित की।

Nobel Prize for Medicine 2026: Official Tweet

 

खोज का सफर: हरे शैवाल से स्तनधारियों के दिमाग तक

यह क्रांतिकारी खोज किसी एक दिन का परिणाम नहीं है, बल्कि दशकों के गहन शोध का नतीजा है:

  1. चैनलरोडोप्सिन (Channelrhodopsin) की खोज: पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल ने सूक्ष्म हरे शैवाल (Green Algae) का अध्ययन करते हुए पाया कि वे प्रकाश की ओर तैरने के लिए विशेष प्रोटीन का उपयोग करते हैं। उन्होंने पाया कि जब इस प्रोटीन पर प्रकाश पड़ता है, तो कोशिका झिल्ली (Cell Membrane) में एक छेद या चैनल खुल जाता है, जिससे आयन (Ions) अंदर-बाहर होने लगते हैं।
  2. न्यूरॉन्स को नियंत्रित करना: कार्ल डाइसेरोथ ने महसूस किया कि तंत्रिका कोशिकाएं भी विद्युत संकेतों (Ions Flow) पर काम करती हैं। उन्होंने इस शैवाल वाले जीन को चूहों के न्यूरॉन्स में डाला और नीले प्रकाश (Blue Light) का उपयोग करके न्यूरॉन को सक्रिय करने में सफलता हासिल की।
  3. जीवित जीवों पर सफल परीक्षण: डाइसेरोथ ने ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fibers) के जरिए जीवित चूहों के मस्तिष्क में प्रकाश भेजा, जिससे चुनिंदा न्यूरॉन्स सक्रिय हो गए और चूहों की गतिविधियों और व्यवहार को नियंत्रित किया जा सका।
Akshara Verma
Akshara Verma

Executive - Editorial

Akshara Verma is a digital journalist. She writes in Hindi and is a subject matter expert in Education, Government Jobs, Current Affairs, General Knowledge, News, delivering accurate and authoritative content for a wide readership of Jagran Josh.

A graduate of Bharati Vidyapeeth's Institute of Computer Applications and Management (BVICAM) with a Bachelor of Journalism and Mass Communication, Akshara brings a strong academic and professional foundation to her work. She has previously held content writing and Public Relations roles at Genesis BCW and Dainik Bhaskar, experiences that have sharpened her ability to craft impactful, audience-first content across diverse formats. She can be reached at akshara.verma@jagrannewmedia.com.

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First Published: Oct 5, 2026, 17:15 IST

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